गिर्दा को याद करने का आपके लिए क्या मतलब है?
क्या उस गिर्दा को याद करते हो, जो हाड़-मांस का पुतला था? या, उस गिर्दा को याद करते हो जो अपने विचारों-गीतों-आंदोलनों में था और आज भी मौजूद है?
गिर्दा लिखता-गाता था- 'कैसा हो स्कूल हमारा/ जहां प्रश्न हल तक पहुंचाएं, ऐसा हो स्कूल हमारा/ जहां किताबें निर्भय बोलें, ऐसा हो स्कूल हमारा...।'
क्या आप हमारी सड़ी-गली शिक्षा व्यवस्था को आमूल बदलने की मांग का समर्थन करते हो या खाली गिर्दा को याद करने की रस्म निभाते हो? क्या आप इस देश के परेशान हाल बच्चों के साथ हो या उनका बर्बर दमन करने वाली सरकार के साथ खड़े रहते हो? आपके लिए गिर्दा को याद करने के मायने क्या हैं?
गिर्दा ने सवाल पूछा था- 'सारा पानी चूस रहे हो, नदी समंदर लूट रहे हो/ गंगा-यमुना की छाती पर कंकड़-पत्थर कूट रहे हो/ लेकिन जिस दिन डोलेगी यह धरती, बोल ब्योपारी तब क्या होगा?'
आप नदी-पहाड़-जंगल-जमीन लूटने वालों 'ब्योपारियों' के विरोध में खड़े हो या उनके बगलगीर हो और तालियां बजा रहे हो? आप खाली गिर्दा की तस्वीर पर फूल चढ़ा रहे हो या उसके विचार का मान रख रहे हो?
'सावनी सांझ आकाश खुला है, ओ हो रे, द दिगौ लाली' या ' हुलरी ऐगे ब्याल' आदि गिर्दा के गीतों के सौंदर्य बोध में ही डूबे रहते हो या उस सौंदर्य बोध की जड़ में जाते हो? 'हम लड़ते रयां भुला, हम लड़ते रूंलो' की उसकी पुकार भी सुनते हो? गाने में तो बहुत मजा ले रहे हो लेकिन किस मोर्चे पर लड़ रहे हो, पूछो तो अपने आप से!
'पानी बिच मीन पियासी, खेतों में भूख उदासी/ ये उलटबांसियां नहीं कबीरा/ खालिस चाल सियासी' कहा था गिर्दा ने। सियासी चालों को समझते हो या उन्हीं के बहकावे में आते हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्हीं सियासी चालों को चलने में खुद भी शामिल हो?
ऐसा क्यों है कि आप गिर्दा को भी गाते हो और उत्तराखण्ड या देश को बर्बाद करने वालों के साथ प्रस्न्न मुद्रा में फोटो खिंचवाते हो और उन्हीं के रंग में रंगे रहते हो?
गिर्दा का सपना था- 'कस होलो उत्तराखण्ड, कास हमारा नेता/ जड़ कंजड़ि उखेलि भली कै, पुरि बहस करूंलो?' यह सपना याद है या भूल गए हो?
उत्तराखण्ड में क्या हो रहा है, कौन मचाए हुए है खुली लूट, क्या सपना था उत्तराखण्ड का, इस पर कभी बात-बहस करते हो? थोड़ी-बहुत चिंता भी होती है या जो गिर्दा की चिंता में शामिल हैं, उनको देशद्रोही बताने में ही अपनी ऊर्जा लगा देते हो?
गिर्दा ने 'अंधायुग' खेलकर और 'नगाड़े खामोश हैं' लिखकर सचेत नहीं किया था क्या? उसकी चेतावनी सुनते-समझते हो या खाली यूट्यूब पर गिर्दा-गिर्दा सुनाते हो?
गज़ब ही कर देते हो आप जब जोर-जोर से गाते हो- 'जैंता एक दिन तो आलो उ दिन यो दुनी में/ जै दिन चोर नी फलाला, कै कै जोर नी चललो...।' लेकिन आप तालियां बजा-बजा कर गिर्दा के केवल शब्द गा रहे हो या 'उस दिन' को लाने के लिए वास्तव में कुछ जतन भी कर रहे हो?
गिर्दा की ही तर्ज़ पर मैं पूछना चाहता हूं, 'जब मेरे देश में पेड़ पेड़ों के खिलाफ, पानी पानी के खिलाफ और पहाड़ पहाड़ों के खिलाफ पेश किए जा रहे हैं', तो कहीं ऐसा तो नहीं कि सिर्फ गा-गाकर आप गिर्दा को गिर्दा के ही खिलाफ खड़ा कर दे रहे हो?
कहीं इसीलिए तो उत्तराखण्ड सरकार भी गिर्दा के नाम पर पुरस्कार नहीं देने लगी है? क्या यह सरकार गिर्दा के विचारों का सम्मान करती है या आपकी तरह उसे उसी के विरुद्ध खड़ा कर रही है?
गिर्दा के गीत गाने और फोटो पर माला चढ़ाने से फुर्सत मिले तो इन सवालों पर भी तनिक विचार कर लेना और याद रखना, गिर्दा सब समझता था-
'बेच खाया है मुझे कितना, किसे बेचा है
बात ये दिल में लाओ तो कोई बात करें।'
- नवीन जोशी, 22 अगस्त 2026, लखनऊ

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