नई दिल्ली के कर्तव्य भवन क्षेत्र (Central Vista) के विस्तार लिए कटिबद्ध मोदी सरकार के पास देश के सबसे पुराने पुस्तकालय के लिए जगह नहीं है। कर्तव्य भवन विस्तार के दूसरे चरण में शास्त्री भवन को गिराया जाना है। इस भवन की चार मंजिलों में स्थित केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सेंट्रल सेक्रेटरिएट लाइब्रेरी) को अब तक पर्याप्त नई जगह नहीं दी गई है। यह देश की सबसे पुरानी और दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है, जिसमें 8.5 लाख से अधिक किताबें और बहुत पुराने दुर्लभ दस्तावेज हैं।
ब्रिटिश सरकार ने 1891 में कलकत्ता में 'इम्पीरियल सेक्रेटरिएट लाइब्रेरी' के नाम से इसकी स्थापना की थी। तब अंग्रेजों ने कलकत्ता को भारत की राजधानी बनाया हुआ था। 1911 में जब दिल्ली को राजधानी बनाया गया तो इस पुस्तकालय को भी दिल्ली लाया गया और सिविल लाइंस के पुराने सचिवालय भवन में इसे जगह दी गई। जब अंग्रेजी ने रायसीना हिल्स के इर्द-गिर्द नया सचिवालय विकसित किया तो इस लाइब्रेरी को नॉर्थ ब्लॉक में जगह दी गई थी।
देश की स्वतंत्रता के बाद इसे सेंट्रल सेक्रेटरिएट लाइब्रेरी नाम दिया गया। 1969 में इसे शास्त्री भवन में 5500 वर्ग मीटर जगह देकर स्थानतरित किया गया। तब से यह पुस्तकालय शास्त्री भवन की चार मंजिलों में चल रहा है। अब शास्त्री भवन को गिराया जाना है ताकि वहां नए कर्तव्य भवनों का निर्माण किया जा सके। उसके बहुत से विभागों के लिए जगह तय की जा चुकी है लेकिन इस पुस्तकालय के लिए अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
इस पुस्तकालय में सन 1702 ई तक की बहुमूल्य पुरानी किताबें और दस्तावेज हैं। दुर्लभ पुस्तकों एवं दस्तावेजों के लिए एक पूरा सेक्शन ही बना हुआ है। इससे इसकी उपयोगिता और महत्ता समझी जा सकती है। इसी पुस्तकालय में 1984 के बाद के भारत सरकार के सभी प्रकाशन भी संग्रहीत हैं।
17 सितम्बत 2026 को केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग ने शास्त्री भवन में स्थित सभी मंत्रालयों एवं विभागों को लिखा कि इस इमारत को सारे फर्नीचर और दूसरे सामान सहित शीघ्रातिशीघ्र खाली किया जाना है। खाली इमारत को सितम्बर के अंत तक नवनिर्माण के लिए सौंप दिया जाना है। जाहिर है, उसे ध्वस्त करके ही नवनिर्माण होगा।
बीती जनवरी में केंद्रीय आवास विभाग ने इस लाइब्रेरी के लिए मात्र 300 वर्ग मीटर वाले दो कमरे कर्तव्य भवन-2 में आवंटित किए थे। इस प्रस्ताव को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने अस्वीकार कर दिया। लाइब्रेरी इसी मंत्रालय के अधीन है। उसने लिखा कि 300 वर्ग मीटर की जगह इतनी विशाल लाइब्रेरी के लिए बहुत ही कम है, जो अभी करीब 5500 वर्ग मीटर में स्थित है।
2023 से ही शास्त्री भवन को खाली कराने की योजना बन गई थी। तत्कालीन संस्कृति सचिव ने लाइब्रेरी के लिए कम से कम साढ़े पांच हजार वर्ग मीटर जगह मांगी थी। इस पर चुप्पी रही। फिर जनवरी 2026 में बताया गया कि 'सक्षम प्राधिकार' ने सिर्फ दो कमरे लाइब्रेरी के लिए तय किए हैं। जवाब में उन्हें फिर लिखा गया कि इतनी जगह लाइब्रेरी की किताबों और पुराने दस्तावेजों के लिए बहुत ही कम है।
संस्कृति मंत्रालय के शंकित हैं। उनकी शंका का कारण भी है, क्योंकि क्षेत्रीय भाषाओं वाला उनका तुलसी सदन पुस्तकालय, जिसमें क्षेत्रीय भाषा व संस्कृति सबंधी करीब दो लाख किताबें हैं, पिछले पंद्रह साल से 'अस्थायी रूप से' बंद है। उसकी किताबें कई गत्तों में कैद हैं, पता नहीं किस हाल में।
रामचरित मानस के 400 साल पूरे होने के अवसर पर 'तुलसी सदन लाइब्रेरी' बनाई गई थी और उसे मंडी हाउस में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के भवन में जगह दी गई थी। 2011 में मण्डी हाउस मेट्रो रेल स्टेशन बनाने के लिए वह भवन तोड़ा गया और लाइब्रेरी को 'अस्थाई रूप से' बंद किया गया। तब से यह बंद है। उसे कोई नई जगह आज तक न मिली। 'इंडियन एक्सप्रेस' अखबार के संवाददाता ने आर के पुरम के एक दफ्तर के गोदाम में इन किताबों के बंद गत्ते देखे, जिनमें आज भी 'अग्रवाल पैकेजर्स एंड मूवर्स' लिखा हुआ दिखता है। यानी 2011 में यहां लाए जाने के बाद से इन्हें खोला नहीं गया।
क्या यही हाल 8.5 लाख किताबों वाली सेंट्रल सेक्रेटरिएट लाइब्रेरी का भी होगा? कर्तव्य भवन नवनिर्माण परियोजना ने सिर्फ नए आकर्षक भवन बनाने तक सीमित है या प्राचीन अमूल्य धरोहरों को सुचिंति रूप में संरक्षित करना भी इसमें शामिल है?
क्या कोई सुन रहा है?
- न जो, (Indian Express, 30 सितम्बर 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर)
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