Thursday, January 22, 2026

साम्प्रदायिक घृणा फैलाने की होड़ में हैं न्यूज चैनल

निजी टी वी समाचार चैनलों और डिजिटल माध्यम अपनी आचार संहिता का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। साम्प्रदायिक वैमनस्य और जातीय घृणा फैलाने में वे बहुत आगे हैं। इसके लिए वे 'लैण्ड जिहाद', 'लव जिहाद' और 'थूक जिहाद' जैसे अपमानजनक नारों का इस्तेमाल करते हैं। वे आबादी बढ़ने के आंकड़ों का एकतरफा व मनमाना उपयोग करते हैं। ये चैनल सत्ताधारियों का भोंपू बन गए हैं और इस प्रतियोगिता में एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगे हैं।

निजी चैनलों के बारे में 'समाचार प्रसारण एवं डिजिटल मानक प्राधिकरण' तक पहुंची शिकायतों की जांच के निष्कर्ष और उसके आदेश  यही बताते हैं। शिकायतों की जांच करने वाले इस प्राधिकरण का गठन स्वयं 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन' ने किया है, जो कि निजी टीवी चैनलों और डिजिटल माध्यम चलाने वालों की अपनी संस्था है। 

जैसे प्रिण्ट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल है, वैसे ही इसे निजी टीवी चैनलों की परिषद समझा जा सकता है। उसने इन माध्यमों के लिए एक आचार संहिता बनाई है, जिसका पालन माध्यमों की आज़ादी बनाए रखने के साथ-साथ सामाजिक-नैतिक उत्तरदायित्व निभाने के लिए आवश्यक माना गया है।

Indian Express अखबार ने 22 जनवरी को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में विस्तार से प्राधिकरण तक पहुंची शिकायतों और उनकी जांच के बाद प्राधिकरण के आदेशों का विश्लेषण करते हुए विस्तार से रिपोर्ट प्रकाशित की। 23 जनवरी के अंक में उसने इस बारे में एक कड़ा सम्पादकीय भी लिखा है, जिसमें निजी टीवी चैनलों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैए की तीखी निंदा की है। 

अखबार के अनुसार 01 जनवरी 2023 से 31 दिसम्बर 2025 तक प्राधिकरण ने 54 शिकायतों पर विचार के बाद आदेश पारित किए। 60 प्रतिशत  शिकायतों में प्राधिकरण ने पाया कि चैनलों ने साम्प्रदायिक सद्भाव सबंधी आचार संहिता का उल्लंघन किया। जमीन कब्जे के मामलों को 'लैण्ड जिहाद', 'महिलाओं के मामलों को 'लव जिहाद' और खाने से सम्बद्ध खबरों मे 'थूक जिहाद' कहा गया।  

जिन 32 शिकायतों में प्राधिकरण ने सम्बद्ध चैनलों के खिलाफ निंदात्मक कार्रवाई की वे साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वाली, अल्पसंख्यकों के प्रति नफरत से भरी और आंकड़ों के मनमाना इस्तेमाल की हैं। 

प्राधिकरण अपने सदस्य चैनलों/माध्यमों  को आपत्तिजनक सामग्री पूरी तरह या आंशिक रूप से हटाने का आदेश देने से लेकर जुर्माना तक लगा सकता है। यह जुर्माना अधिकतम 25 लाख रु हो स्कता है।

प्राधिकरण के आदेशों का विश्लेषण करते हुए अखबार ने पाया कि शिकायतों से निपटने में प्राधिकरण काफी उदार रहा है। उसने शिकायतों की सुनवाई और उनके निपटारे में 11-12 महीनों का समय लिया और तब तक आपत्तिजनक सामग्री इन माध्यमों पर उपलब्ध रही। वैसे, शिकायतों का निपटारा 15 दिन से लेकर एक महीने तक हो जाना चाहिए।जुर्माना लगाने में भी काफी उदारता बरती गई। 

सिर्फ एक मामले में 'टाइम्स नाऊ नवभारत' पर मात्र एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। पांच अन्य मामलों में इससे कम जुर्माना लगाया गया। छह मामलों में कुल 3.2 लाख रु का जुर्माना हुआ। इसका कोई असर चैनलों पर नहीं पड़ा क्योंकि ये कार्रवाइयां ऐसी नहीं थीं कि चैनल अपने रवैये से बाज आते। 

प्राधिकरण ने 11 शिकायतों पर कोई कार्रवाई इसलिए नहीं की कि उसे कोई खास या गम्भीर उल्लंघन नहीं लगा या चैनलों ने सुधार कर लिया या मामला अदालत पहुंच गया।

प्राधिकरण को ये शिकायतें किसी संस्था से नहीं बल्कि कुछ व्यक्तियों से मिलीं। मात्र एक शिकायत निर्वाचन आयोग से अग्रसारित हुई जो उसे 'न्यूज18इण्डिया' के बारे में भाकपा ने भेजी थी। प्राधिकरण ने पाया कि इस चैनल के एंकर ने यह कहकर गलत किया कि दिल्ली विधान सभा के चुनाव में भाजपा की जीत 'रामजी' के कारण हुई।

नौ शिकायतें टीवी चैनलों पर 'लैंड जिहाद' के मामले दिखाने के लिए आईं। नौ ही शिकायतें 'लव जिहाद' के मामले दिखाने और दो 'थूक जिहाद' की रिपोर्ट दिखाने के लिए आईं। विपक्ष के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार की कई शिकायतों पर प्राधिकरण ने विचार किया। जातीय समूहों एवं आदिवासियों  के प्रति अपमानजनक प्रसारणों की शिकायतें भी थीं।  

सबसे ज़्यादा शिकायतें और प्राधिकरण के आदेश  (16) 'टाइम्स नाऊ नवभारत' के खिलाफ हुए। दूसरे नम्बर पर 'न्यूज18इण्डिया' है, जिसके खिलाफ आठ मामलों में सामग्री हटाने को कहा गया। 'जी न्यूज' को पांच मामलों में रिपोर्ट हटाने को कहा गया। ये आदेश शिकायतों के करीब एक साल बाद आए और तब तक वे प्रसारण अपना काम कर चुके थे। 

प्राधिकरण के वर्तमान अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए के सीकरी हैं। आठ अन्य सदस्यों में चार पूर्व आईएएस व आईएफएस अधिकारी और चार टीवी न्यूज चैनलों के 'सम्पादक हैं। अखबार के पूछने पर जस्टिस सीकरी ने बताया कि शिकायतों का निपटारा सर्वसम्मति से किया जाता है और सर्वसम्मति हासिल करने में वक्त लग जाता है। 

Indian Express ने 23 जनवरी के सम्पादकीय में इस प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे निजी टीवी चैनलों की भड़काऊ व भोण्डी प्रवृत्ति कहा है और लिखा है कि ये चैनल व डिजिटल माध्यम गैरजिम्मेदार होने में एक दूसरे को पीछे छोड़ने में लगे हैं। इसके अत्यंत खतरनाक नतीज़े हैं। मीडिया की विश्वसनीयता ही नहीं घट रही, समाज में अलगाव और विभाजन बढ़ रहा है। खुद ये चैनल अपनी दर्शक संख्या खोते जा रहे हैं।  

- न जो, 23 जनवरी  2026

(अखबार की पूरी रिपोर्ट देखें-

https://indianexpress.com/article/express-exclusive/in-3-years-nearly-60-per-cent-orders-by-tv-digital-news-regulator-cite-communal-code-breach-10487789/