
अधिकसंख्य लोगों की तरह श्याम जी को भी लगा कि अधिकारियों
से शिकायत करने को कोई लाभ नहीं. मुख्यमंत्री सुनें तो सुनें. इसीलिए हर शासनकाल
में मुख्यमंत्री से मिलने वालों की लम्बी कतार होती है. जनता दर्शन में भीड़ उमड़ती
है. यह अलग बात है कि उसमें मुख्यमंत्री जनता के दर्शन ही कर पाते हैं.
श्यामजी भी लखनऊ चला आया. वह मुख्यमंत्री निवास की तरफ गया.
किसी भले पुलिस वाले ने उसे सी एम आवास के अधिकारियों तक पहुंचा दिया. उसने आने का
मकसद बताया लेकिन अधिकारियों ने दो टूक कह दिया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो
सकती. श्यामजी निराश हो गया. मगर वह धुन का पक्का था. हताश वापस नहीं लौटना चाहता
था. क्या करे?
मुख्यमंत्री निवास में उसे पता चला कि कुछ देर में वे अपने
दफ्तर जाने वाले हैं. श्यामजी लोक भवन की तरफ चला आया. मुख्यमंत्री जब इधर आएंगे तो उनका ध्यान कैसे खींचा जाए? कैसे उन तक शिकायत पहुंचाई जाए? उसे मुख्यमंत्री का
काफिला आते दिखा. उसने दुस्साहसिक फैसला किया, जैसा पहले भी कुछ
निरुपाय लोग करते रहे हैं. वह दौड़ा और बीच सड़क पर लेट गया.
फिर जो होना था वही हुआ. उसे पुलिस ने धर दबोचा और
मुख्यमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने का संगीन मामला बनाकर गिरफतार कर लिया.
मुख्यमंत्री आराम से अपने दफ्तर चले गये. श्यामजी को पुलिस पकाड़ ले गयी. मुख्यमंत्री
को शायद कुछ पता भी न चला हो. या उन्हें बताया गया हो कि कोई युवक उन पर हमले के
इरादे से आया था. उसे चुस्त सुरक्षा दस्ते ने पकड़ लिया. मीडिया को भी यही बताया
गया.
गिरफ्तार श्यामजी से कड़ी पूछताछ की गयी. सुरक्षा अधिकारी
साजिश का भंडाभोड़ करने में लगे रहे. भोला श्यामजी लगातार यही कहता रहा कि सोनभद्र
में भाजपा नेताओं के अवैध खनन की शिकायत मुख्यमंत्री से करने आया हूं. मुख्यमंत्री
तक अपनी बात पहुंचाने के लिए मैंने यह कदम उठाया.
किसी ने उसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचाई. उस पर
किसी ने भरोसा नहीं किया होगा. उन्हें हमेशा कुछ सनसनीखेज ढूंढना होता है. चंद
महीने पहले विश्वविद्यालय के कुछ युवक-युवतियां मुख्यमंत्री के काफिले के रास्ते
में इसी मकसद से आ गये थे. उन्हें गम्भीर धाराओं में जेल भेज दिया गया था. उनकी
जमानत बहुत समय बाद हो पायी. विश्वविद्यालय से भी उन्हें निकाल दिया गया था.
मुख्यमंत्री की सुरक्षा का मामला बहुत गम्भीर होता है. श्यामजी को यह सब नहीं
मालूम.
प्रदेश के बहुत सारे नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात
पहुंचाना चाहते हैं -निजी दु:ख-दर्द से लेकर बड़े भ्रष्टाचार और अत्याचारों तक, क्योंकि नीचे सुनवाई नहीं होती. मुख्यमंत्री तक कोई कैसे पहुंचे. वे अफसरों और सख्त सुरक्षा के घेरे में होते
हैं. दुस्साहस करो तो सीधे जेल. इस लोकतंर में कोई अपनी बात सत्ता-शीर्ष तक कैसे
पहुंचाए?
फिलहाल सोनभद्र में अवैध खनन जारी होगा और श्यामजी सलाखों
के पीछे. वह मिले तो पूछना चाहूंगा, क्या अब भी किसी की शिकायत ऊपर तक पहुंचाने
का इरादा है?
(सिटी तमाशा, नभटा, 06 जनवरी, 2017)
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