मतदाता सूची से खास-खास नाम हटाए जाने का 'खेला' किसे प्रकार चल रहा है, इसके साफ-साफ मामले झारखण्ड से सामने आ रहे हैं। वहां चूंकि झारखण्ड मुक्ति मोर्चे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन की सरकार है, वह भाजपा के इस खेल को सफल न होने देने के लिए डटी हुई है, हालांकि अंतिम फैसला निर्वाचन आयोग को ही करना होता है।
झारखण्ड में भाजपा के एक बूथ एजेण्ट (बीएलए) को गलत फॉर्म-7 जमा करने के लिए गिरफ्तार भी किया जा चुका है, हालांकि उसे जमानत मिल गई है। वहां कई बीएलओ ऐसे फॉर्म लेने से इनकार कर रहे हैं। एक बूथ पर भाजपा के एजेंट ने फॉर्म न लिए जाने पर गुस्से में अपने भरे हुए 75 फॉर्म जला डाले।
झारखण्ड में भाजपा के बूथ एजेंट बड़ी संख्या में निर्वाचन आयोग का फॉर्म-7 भरकर खास-खास नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए बीएलओ (चुनाव आयोग का बूथ स्तरीय अधिकारी, जो वास्तव में राज्य सरकार का कर्मचारी होता है) के पास जमा कर रहे हैं। ये खास-खास नाम वास्तव में मुसलमान मतदाताओं के हैं।
राज्य में पिछले मास एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद पहली प्रस्तावित मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। उसके बाद कई बूथों में भाजपा के एजेण्ट फॉर्म-7 की गड्डियां लेकर बीएलओ के पास पहुंचने लगे। बड़ी संख्या में ये फॉर्म मुख्यत: मुस्लिम मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए हैं।
यह 'खेल' विशेष रूप से उन्हीं विधान सभा सीटों में चल रहा है, जहां भाजपा प्रत्याशी पिछले चुनाव में हार गए थे। बीएलओ को अधिकार है कि वह मतदाता सूची में नाम जोड़े या हटाए। फॉर्म सात मिलने पर किसी भी नाम को हटाने से पहले उसे पूरी जांच करनी होती है।
गोड्डा प्रखण्ड के महेशटिकरी गांव के बूथ संख्या 9 पर भाजपा के एजेंट संजीव कुमार रोशन ने 25 ऐसे फॉर्म भरकर बीएलओ के पास जमा किए। इनमें मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने को कहा गया था। बीएलओ अनीशा बानो ने इन फॉर्मों को 'सही' नहीं बताया लेकिन फॉर्म ले लिए। भाजपा एजेंट ने कहा कि अभी अभी 50 और फॉर्म लाऊंगा। बाद में बीएलओ ने बीडीओ से पूछा तो उन्होंने कहा कि ऐसे फॉर्म न लिए जाएं।
बी एल ओ अनीसा बानो ने पूछे जाने पर 'इण्डियन एक्सप्रेस) को बताया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म दिए गए थे वे सभी 2003 की सूची में भी मतदाता थे। इस पुनरीक्षण में सामान्यत: 2003 की सूची में शामिल मतदाताओं को वास्तविक मतदाता माने जाने का निर्देश है।
पछुआ किता के बीएलओ मुख्तार ने बताया कि उसके पास ऐसे 75 फॉर्म आए। लगभग सभी मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए थे लेकिन वे सभी 2003 की मतदाता सूची में शामिल थे। ऐसे फॉर्म और भी बूथों पर दिए गए।
गोड्डा प्रखण्ड के गांव पचरुखी के बूथ संख्या 231 के बीएलओ और कुछ मतदाताओं ने शिकायत की कि भाजपा के बूथ एजेंट गलत ढंग से फॉर्म-7 लाकर मतदाताओं के नाम हटाने को कह रहे हैं। इसके बाद भाजपा एजेंट विनय कुमार मण्डल के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट लिखी गई और उसे गिरफ्तार किया गया।
मंडल ने करीब 200 फॉर्म भरकर बीएलओ साजिदा बीबी को दिए थे। जिनके नाम हटाने के लिए फॉर्म भरे गए थे, उनमें खुद बीएलओ साजिदा बीबी और उसके परिवार वालों के नाम थे।
राज्य की सरकार में शामिल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। उन्होंने भाजपा की इस साजिश का विरोध करना शुरू किया। मतदाता सूची में नाम हटाने-जोड़ने का यह खेल राजनीतिक मोर्चेबंदी में बदल गया है।
सामान्यत: ऐसी खबरें मीडिया में नहीं आ रहीं। इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने इस बारे में जमीनी तहकीकात करके कई खबरें प्रकाशित कीं। उसने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी बात की। उनका कहना है कि बीएलओ फॉर्म-7 लेने से इनकार नहीं कर सकते।
मतदाता सूची में मुस्लिम मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाने के बहुत सारे आरोप बिहार और बंगाल में भी लगे थे। बिहार में भाजपा सरकार में शामिल थी लेकिन बंगाल में तब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं। वहां से बीएलओ की ऐसी आपत्तियों की खबरें सामने नहीं आई थी, हालांकि लाखों की संख्या में नाम हटाए गए।
वैसे, ममता बनर्जी ने राज्य में गलत ढंग से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए भाजपा और उसके साथ मिली भगत के लिए निर्वाचन आयोग पर खूब आरोप लगाए। वे सुप्रीम कोर्ट तक खुद बहस करने गईं थीं।
सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर की गम्भीर विसंगतियों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कोर्ट ने एसआईआर को पूरा समर्थन देते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं। तब कोर्ट की यह टिप्पणी बहुत विवादास्पद रही थी कि जो इस बार वोट नहीं दे पाएंगे, वे अगले चुनाव में दे लेंगे।
बहरहाल, झारखण्ड के इन मामलों से यह स्पष्ट हो गया है कि एसआईआर में भाजपा के बूथ स्तरीय एजेंट अत्यंत सक्रिय हैं और उनका खास जोर मुस्लिम मतदाताओं के नाम सूची से हटवाने पर है। अन्य दल बूथ स्तर पर इतने सक्रिय नहीं हैं या उनके पास जमीनी कार्यकर्ताओं की कमी है।
एसआईआर की प्रक्रिया शुरू से ही अत्यंत विवादित है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी समेत कई प्रमुख व्यक्तियों ने इसका तीखा विरोध कियाहै। कुरैशी जी ने तो हाल में एक लेख लिखकर व्यंग्य किया है कि भारत की जनसंख्या को, जो दशकों के कई अभियानों के बाद नियंत्रित नहीं हो पाई है, रातोंरात करोड़ों में कम कर देने का उल्लेखनीय काम निर्वाचन आयोग कर रहा है।
- न जो, 6 सितम्बर 2026
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